सीएमओ पर नियम उल्लंघन का आरोप, बरेली स्वास्थ्य विभाग फिर विवादों मेंजूनियर डॉक्टर को सीनियर पद की जिम्मेदारी, योगी सरकार के नियमों की खुली अवहेलना



रिपोर्ट : वीरेंद्र बिष्ट
बरेली। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में स्वास्थ्य विभाग एक बार फिर विवादों में है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. विश्राम सिंह पर गंभीर आरोप लगे हैं कि उन्होंने लेवल-3 के जूनियर डॉक्टर को लेवल-4 के सीनियर पद की जिम्मेदारी सौंप रखी है। यह निर्णय न केवल विभागीय नियमों के विरुद्ध है, बल्कि योगी सरकार के सेवा नियमों की खुलेआम अवहेलना भी माना जा रहा है।
विभागीय सूत्रों का कहना है कि सीएमओ ने नियमों को दरकिनार करते हुए जूनियर डॉक्टर को लंबे समय से सीनियर जिम्मेदारियों में बनाए रखा है। इससे वरिष्ठ डॉक्टरों में असंतोष है और विभाग में प्रशासनिक असंतुलन बढ़ता जा रहा है।
नियमों के अनुसार, उच्च स्तर की जिम्मेदारी केवल उसी चिकित्सक को दी जा सकती है जिसकी पदोन्नति या शासन स्तर से स्वीकृति हो, लेकिन इस मामले में ऐसा कोई आदेश जारी नहीं हुआ बताया जा रहा है।
इससे पहले भी बरेली स्वास्थ्य विभाग में जूनियर डॉक्टरों को सीनियर पदों पर बैठाने के मामले सामने आ चुके हैं, जिन पर जांच के आदेश दिए गए थे।
फिलहाल, इस प्रकरण पर स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि शिकायत ऊपरी स्तर तक पहुंचने की संभावना है।
योगी सरकार जहां स्वास्थ्य सेवाओं को पारदर्शी और नियमसम्मत बनाने की दिशा में लगातार प्रयासरत है, वहीं इस तरह के मामले इन दावों पर प्रश्नचिह्न लगाते हैं।
 
 स्वास्थ्य विभाग के नियम क्या कहते हैं।

लेवल-3 डॉक्टर : सामान्यतः जूनियर या मेडिकल ऑफिसर स्तर के पद होते हैं, जिनकी ज़िम्मेदारी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) या सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) स्तर तक सीमित रहती है।
लेवल-4 पद : वरिष्ठ चिकित्सक, प्रभारी या विशेषज्ञ (Specialist) श्रेणी में आते हैं, जिन्हें प्रशासनिक जिम्मेदारियां भी सौंपी जाती हैं।
नियम 2001 (उत्तर प्रदेश चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा नियमावली) के अनुसार, किसी भी अधिकारी को उच्च पद का कार्यभार तभी दिया जा सकता है जब उसे शासन स्तर से अनुमोदन प्राप्त हो।
अनुमोदन के बिना तैनाती को प्रशासनिक अनियमितता माना जाता है और इस पर विभागीय जांच या निलंबन की कार्रवाई भी संभव है।
पूर्व में 2022 और 2024 में भी बरेली, मेरठ और गोरखपुर जिलों में ऐसी तैनातियों पर मुख्य सचिव स्तर से जांच आदेश जारी किए जा चुके हैं।

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