इस्वा संगठन पर सरकारी डॉक्टरों की संलिप्तता के आरोपों से मचा बवाल
रिपोर्ट-वीरेंद्र बिष्ट पत्रकार के रुख में अचानक बदलाव से उठे सवाल-दबाव या सौदेबाज़ी? बरेली। शहर के प्राइवेट मुस्लिम डॉक्टरों के संगठन इंटेलेक्चुअल सोशल वेलफेयर एसोसिएशन (इस्वा) एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गया है। इस संगठन पर उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य विभाग के कई सरकारी डॉक्टरों और अधिकारियों के जुड़े होने के गंभीर आरोप लग रहे हैं। सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर तीखी बहस छिड़ी हुई है। मामला तब और दिलचस्प हो गया जब एक स्थानीय पत्रकार, जिन्होंने कुछ समय पहले इस्वा की कार्यप्रणाली और संगठन में कथित अनियमितताओं को उजागर किया था, अचानक अपने रुख से पलट गए। अब वही पत्रकार इस्वा के समाजसेवी कार्यों की खुलकर तारीफ कर रहे हैं। लोगों के बीच सवाल उठ रहा है- क्या पत्रकार ने दबाव में आकर रुख बदला है या यह किसी सौदेबाज़ी का नतीजा है? पहले की पोस्ट में उठाए थे गंभीर सवाल सूत्रों के अनुसार, कुछ सप्ताह पूर्व उक्त पत्रकार ने सोशल मीडिया पर कई पोस्ट साझा की थीं, जिनमें इस्वा में दर्जनों खामियों और नियमों के उल्लंघन का ज़िक्र था। पोस्टों में आरोप लगाया गया था कि सरकारी डॉक्टर एक निजी सं...

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