वामन मेश्राम साहब सबसे शक्तिशाली नेतृत्व (भारत मुक्ति मोर्चा)
"मा. वामन मेश्राम साहब यह एक ऐसा नाम है । जिस नाम की वजह से भारत में रहनेवाले विदेशी ब्राह्मण लोग काफी हैरान / परेशान हो रहे है । यह लोग अब मा. वामन मेश्राम साहब को रोख भी नही सकते । क्योंकी, रोखने पर उसका अंजाम क्या होगा? यह ब्राह्मण लोग अच्छी तरह से जानते है ।
बामसेफ ने राष्ट्रीय मुस्लिम मोर्चा के माध्यम से ५ नवंबर २०१७ को नागपुर में एक कार्यक्रम लिया था । उस कार्यक्रम में तीन लाख से अधिक लोग उपस्थित थे । नागपुर यह दिक्षाभुमी होणे के साथ - साथ संघ का मुख्यालय भी माना जाता है । उसी संघ के मुख्यालय में जाकर ब्राह्मणों के सारे षढयंत्र को उजागर करणा / ब्राह्मण / ब्राह्मणवाद / ब्राह्मणी व्यवस्था / ब्राह्मणी धर्म को ललकरना / चुनौती देना यह कोई आम बात नही है । यह बहुत बड़ी बात है ।
५ नवंबर २०१७ का कार्यक्रम इतना जबरदस्त था की, उसके दुसरे दिन ही ६ नवंबर २०१७ को आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को बामसेफ ने प्रतिक्रिया देणे पर मजबूर किया था । मोहन भागवत ने उसके भाषण में कहाँ था की, "जातीवाद देश का दुर्भाग्य है । पिछड़े वर्ग को आरक्षण जारी रहे" । उसने यह नही कहाँ की, जाती किसने बनाई? हमारे हक अधिकार और हमारे हिस्से पर किसकी भागीदारी है? धीरे - धीरे इन सभी ब्राह्मणों को बोलने पर बामसेफ मजबूर करणेवाला है । पहले ब्राह्मण लोग क्रिया करते थे । और हमारे लोग प्रतिक्रिया देते थे । लेकीन अब हमारे लोग क्रिया कर रहे है । और ब्राह्मण लोग प्रतिक्रिया दे रहे है । यह ऐसे ही संभव नही हुआ..! उसके पिछे बामसेफ जैसे राष्ट्रव्यापी संगठन की बहुत बड़ी भुमिका है ।
नागपुर का ५ नवंबर २०१७ का कार्यक्रम होणे के करीब एक महिना बाद ब्राह्मण लोगों ने एक बहुत ही घटिया चाल खेली है । उन्होंने लव जिहाद के नाम पर एक पचास साल बुजुर्ग मुहम्मद अफराजूल की शंभु कुमार रैगर नामक एक व्यक्ति के माध्यम से हत्या की है । अब वह हत्या किसने? क्यों की? और वह हत्या करणेवाला व्यक्ति कौनसे आतंकवादी संगठन का स्वयंसेवक है? उसके पिछे कौन है? उसका सारा पर्दाफाश बामसेफ और भारत मुक्ति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मा. वामन मेश्राम साहब ने १० ड़िसेंबर २०१७ को इंदापुर में हुये कार्यक्रम के दौरान किया है । इतनाही नही बल्की बामसेफ ने राजस्थान में जाकर भी एक बहुत बड़ा कार्यक्रम किया । और वह कार्यक्रम होणे के बाद मा. वामन मेश्राम साहब, मौलाना सज्जाद नोमानी साहब की बेटी सोमैया नोमानी साहिबा और राष्ट्रीय मुस्लिम मोर्चा झारखंड के प्रदेश अध्यक्ष जनाब शकील खान साहब ने महमूद अफराजूल के परिवार वालों की भेंट ली । उनकी मुलाकात ली । और उन्हे एक लाख की मद्द भी की । और उसके साथ - साथ जब तक उस हत्यारे शंभू कुमार रैगर को फांसी नही होती तब उसकी केस बामसेफ लढेगा ऐसा भी कहाँ । मेश्राम साहब की निर्णय की वजह से आरएसएस के ब्राह्मणों मे काफी हड़कंप मचा हुआ है ।
मा. वामन मेश्राम साहब को रोखने की सिर्फ ब्राह्मण लोग ही नही बल्की खुद्द को आंबेडकरवादी कहनेवाले कुछ एकजातीय नेता लोग भी उसमें शामिल है । उन्होंने मेश्राम साहब को रोखने की कोशिश करणे के बजाय आज मा. वामन मेश्राम साहब देश भर में जिन मुद्दों को लेकर काम कर रहे है । जिन समस्या को उठा रहे है । उस पर ही आंबेडकरवादी नेताओं ने काम करणा चाहिए । अगर आप हमारे मुद्दों पर काम करते हो तो हम पुरे संगठन शक्ती के साथ आपके साथ खड़े रहने के लिए कभी भी तैयार है ।
भारत देश में बामसेफ ने जो एकता का निर्माण किया है । उस एकता को तोड़ने के लिए ब्राह्मण लोग तमाम कोशिशे कर रहे है । फिर भी देश के सारे मजलुम बामसेफ के बैनर में इकट्ठे हो रहे है । याद रहे..! अब बामसेफ का लक्ष्य और हममें सिर्फ समय का ही अंतर है".
- निरंजन लांडगे.
(भारत मुक्ति मोर्चा)
जय मूलनिवासी..
निरंजन ला लोंग डे

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