बैठक है वीरान !!

बैठक है वीरान !! ----------------- चूस रहे मजलूम को, मिलकर पुलिस-वकील ! हाकिम भी सुनते नहीं, सच की सही अपील !! ●●● जर्जर कश्ती हो गई, अंधे खेवनहार ! खतरे में सौरभ दिखे, जाना सागर पार !! ●●● थोड़ा-सा जो कद बढ़ा, भूल गए वो जात ! झुग्गी कहती महल से, तेरी क्या औकात !! ●●● बूढ़े घर में कैद हैं, पूछ रहे न हाल ! बचा-खुचा खाना मिले, जीवन हैं बेहाल !! ●●● हत्या-चोरी लूट से, कांपे रोज समाज ! रक्त रंगे अखबार हम, देख रहे है आज !! ●●● किसे सुनाएँ वेदना, जोड़े किस से आस ! नहीं खून को खून का, सौरभ जब अहसास !! ●●● आकर बसे पड़ोस में, ये कैसे अनजान ! दरवाजे सब बंद है, बैठक है वीरान !! --- डॉo सत्यवान सौरभ,

Comments

Popular posts from this blog

गुरु पूर्णिमा पर गुरुओं का सम्मान एवं भंडारे का आयोजन

इस्वा संगठन पर सरकारी डॉक्टरों की संलिप्तता के आरोपों से मचा बवाल

सीएमओ पर नियम उल्लंघन का आरोप, बरेली स्वास्थ्य विभाग फिर विवादों मेंजूनियर डॉक्टर को सीनियर पद की जिम्मेदारी, योगी सरकार के नियमों की खुली अवहेलना